Tuesday, September 9, 2025

श्राद्ध और पितृ पक्ष :पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता का पर्व

श्राद्ध एवं पितृ पक्ष : पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता का पर्व
   - डॉ राजेश बतरा 
हिंदू धर्म में श्राद्ध एवं पितृ पक्ष का विशेष महत्व है। भाद्रपद मास की पूर्णिमा से लेकर आश्विन मास की अमावस्या तक के 16 दिन पितृ पक्ष के नाम से जाने जाते हैं। इस अवधि में अपने दिवंगत पितरों को स्मरण कर तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध किया जाता है। यह केवल धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं, बल्कि पूर्वजों के प्रति श्रद्धा, कृतज्ञता और स्मरण का प्रतीक है।
पितृ पक्ष का महत्व
हिंदू मान्यता के अनुसार, मनुष्य तीन ऋणों के साथ जन्म लेता है –
1. देव ऋण – देवताओं की उपासना से पूर्ण होता है।
2. ऋषि ऋण – ज्ञान, धर्म और संस्कृति के पालन से पूर्ण होता है।
3. पितृ ऋण – श्राद्ध, तर्पण और पितरों के स्मरण से पूर्ण होता है।
पितृ पक्ष में किए गए दान-पुण्य और श्राद्ध से पितरों की आत्मा को तृप्ति मिलती है और वे अपने वंशजों को आशीर्वाद देते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस समय पितरों की आत्माएं पृथ्वी पर आती हैं और अपने वंशजों से तर्पण एवं श्रद्धा की अपेक्षा करती हैं।
श्राद्ध की विधि
श्राद्ध आमतौर पर घर या पवित्र स्थलों पर किया जाता है। इसमें निम्न कार्य शामिल होते हैं –
तर्पण : जल, तिल और कुशा अर्पित करके पितरों को स्मरण करना।
पिंडदान : आटे या चावल के लड्डू बनाकर पितरों को समर्पित करना।
हवन एवं पूजा : मंत्रोच्चारण के साथ पितरों की शांति के लिए आहुतियां देना।
ब्राह्मण एवं जरूरतमंदों को भोजन कराना : इसे पितरों को अर्पित भोजन माना जाता है।
पितृ पक्ष में क्या करें
पितरों का नाम लेकर तर्पण व पिंडदान करें।
ब्राह्मणों, गौ, कुत्ते, पक्षियों और गरीबों को भोजन व दान दें।
घर में सात्विकता बनाए रखें, किसी का अपमान न करें।
जरूरतमंदों की मदद करें और पुण्य कार्य करें।
पितृ पक्ष में क्या न करें
मांसाहार, शराब एवं नशे से दूर रहें।
झूठ बोलना, क्रोध करना और अपशब्द कहना त्याग दें।
किसी का धन या वस्तु हड़पना पितरों को अप्रसन्न करता है।
आध्यात्मिक दृष्टि से महत्व
पितृ पक्ष केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आध्यात्मिक साधना का अवसर भी है। जब हम अपने पितरों को याद करते हैं, तो भीतर कृतज्ञता और नम्रता का भाव जाग्रत होता है। यह भाव हमें अपने जीवन को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाने की प्रेरणा देता है।
👉 निष्कर्ष :
श्राद्ध एवं पितृ पक्ष पूर्वजों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने का श्रेष्ठ अवसर है। इस समय किए गए सत्कर्म न केवल पितरों को शांति प्रदान करते हैं, बल्कि परिवार में सुख-समृद्धि और सद्भाव भी लाते हैं। यह पर्व हमें याद दिलाता है कि हमारे जीवन का आधार हमारे पूर्वज ही हैं और उनकी स्मृति एवं आशीर्वाद से ही हमारा वर्तमान और भविष्य उज्ज्वल बनता है।

No comments:

Post a Comment