🌸 नवरात्रि एवं नवदुर्गा का महत्त्व 🌸
- डॉ राजेश बतरा
प्रस्तावना
भारतीय संस्कृति उत्सवों की भूमि है और उनमें सबसे विशेष स्थान नवरात्रि को प्राप्त है। यह उत्सव वर्ष में दो बार – चैत्र और आश्विन (शारदीय) मास में मनाया जाता है। नवरात्रि का अर्थ है – नौ रातें। इन नौ रातों में भक्तजन माँ दुर्गा के नव रूपों की उपासना करते हैं। यह पर्व शक्ति, भक्ति और साधना का अद्वितीय संगम है।
शास्त्रवचन:
“या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥”
---
नवरात्रि का इतिहास एवं महत्व
पुराणों के अनुसार जब महिषासुर नामक असुर ने देवताओं को पराजित कर त्रिलोक में आतंक मचाया, तब त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु और महेश) की संयुक्त ऊर्जा से माँ दुर्गा का प्राकट्य हुआ।
माँ दुर्गा ने नौ दिनों तक महिषासुर से युद्ध किया और दशम दिन उसका वध कर विजय प्राप्त की।
इसीलिए दशम दिन को विजयादशमी (दशहरा) के रूप में मनाया जाता है।
नवरात्रि केवल धार्मिक पर्व ही नहीं बल्कि यह साधना, संयम, उपवास और आत्मशुद्धि का मार्ग भी है।
---
🌺 नवदुर्गा एवं दिनवार पूजन 🌺
1. प्रथम दिन – शैलपुत्री माता
पर्वतराज हिमालय की पुत्री, आद्य शक्ति।
स्थिरता और आत्मबल प्रदान करती हैं।
श्लोक:
“वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥”
---
2. द्वितीय दिन – ब्रह्मचारिणी माता
तप और ब्रह्मचर्य की देवी।
साधक को संयम और ज्ञान देती हैं।
श्लोक:
“दधाना करपद्माभ्यां कमण्डलु-जपमालके।
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥”
---
3. तृतीय दिन – चंद्रघंटा माता
इनके मस्तक पर अर्धचंद्राकार घंटा।
पूजा से भय और नकारात्मक ऊर्जा नष्ट होती है।
श्लोक:
“पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकैर्युता।
प्रसादं तनुते मह्यं चंद्रघंटेति विश्रुता॥”
---
4. चतुर्थ दिन – कूष्मांडा माता
ब्रह्माण्ड की सृष्टि करने वाली देवी।
उपासना से स्वास्थ्य, ऊर्जा और सुख-समृद्धि।
श्लोक:
“सुरासम्पूर्णकलशं रूधिराप्लुतमेव च।
दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥”
---
5. पंचम दिन – स्कंदमाता
भगवान कार्तिकेय की माता।
संतान सुख एवं गृहस्थ जीवन में आनंद देती हैं।
श्लोक:
“सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥”
--
6. षष्ठम दिन – कात्यायनी माता
दानव संहारिणी शक्ति।
विवाह योग्य कन्याओं के लिए विशेष पूजनीय।
श्लोक:
“चन्द्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना।
कात्यायनी शुभं दद्यादेवी दानवघातिनी॥”
---
7. सप्तम दिन – कालरात्रि माता
अंधकार और भय का नाश करने वाली।
उपासना से निर्भयता और सुरक्षा।
श्लोक:
“एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता।
लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी॥”
---
8. अष्टम दिन – महागौरी माता
पवित्रता और सौंदर्य की देवी।
पूजा से जीवन में शांति और समृद्धि।
श्लोक:
“श्वेते वृषे समारूढा श्वेताम्बरधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा॥”
---
9. नवम दिन – सिद्धिदात्री माता
सभी सिद्धियों की प्रदात्री।
साधक को आत्मबल और आध्यात्मिक उन्नति देती हैं।
श्लोक:
“सिद्धगन्धर्वयक्षाद्यैरसुरैरमरैरपि।
सेव्यमाना सदा भूयात्सिद्धिदा सिद्धिदायिनी॥”
---
नवरात्रि में उपवास एवं पूजा विधि
प्रतिदिन स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
कलश स्थापना करें और अखंड ज्योति जलाएँ।
दुर्गा सप्तशती, कवच या चालीसा का पाठ करें।
कन्या पूजन (अष्टमी/नवमी को) करें और उन्हें भोजन कराकर दक्षिणा दें।
---
✅ नवरात्रि में करने योग्य कार्य (Do’s)
सात्विक भोजन और संयमित जीवन।
शक्ति मंत्रों का जप: “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे॥”
ध्यान और आत्मचिंतन।
दान-पुण्य करना।
---
❌ नवरात्रि में वर्जित कार्य (Don’ts)
मांस, मदिरा, प्याज-लहसुन का सेवन न करें।
क्रोध, अपशब्द और हिंसा से बचें।
अपवित्र स्थानों पर भोजन या पूजा न करें।
नाखून, बाल कटवाना अशुभ माना जाता है।
---
वैज्ञानिक दृष्टिकोण
उपवास से पाचन तंत्र को आराम मिलता है और शरीर से विषैले तत्व बाहर निकलते हैं।
ध्यान और जप से मानसिक शांति मिलती है तथा एकाग्रता बढ़ती है।
सूर्य की स्थिति के अनुसार यह समय ऋतु परिवर्तन का होता है, ऐसे में सात्विक आहार शरीर को स्वस्थ रखने में सहायक है।
---
उपसंहार
नवरात्रि केवल देवी की आराधना ही नहीं बल्कि आत्मशुद्धि, संयम और आध्यात्मिक जागरण का पर्व है। जो व्यक्ति श्रद्धा और भक्ति से माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा करता है, उसके जीवन से नकारात्मकता दूर होकर सुख, समृद्धि और शक्ति का संचार होता है।
श्लोक:
“सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके।
शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते॥”
..................................
No comments:
Post a Comment