Awareness Post 101/2022 #drrajeshbatra
*त्रिफला के औषधीय गुण*
परिचय -
त्रिफला एक आयुर्वेद का वरदान है। इसके गुणों की दृष्टि से हम इसे महा औषधि कह सकते हैं।
आयुर्वेद में त्रिफला को शरीर में त्रिदोष (वात,पित्त और कफ) को संतुलित करने के लिए जाना जाता है। त्रिफला पांच प्रकार के रस या स्वाद से युक्त है। इसका स्वाद मीठा, खट्टा, कसैला, कड़वा और तीखा होता है।
*घटक द्रव्य और उनके लाभ*-
त्रिफला या त्रिफला चूर्ण एक सुप्रसिद्ध आयुर्वेदिक मिश्रण है जिसे आमलकी (आंवला), विभीतकी और हरीतकी (हरड़) से तैयार किया गया है। यहां तक कि त्रिफला नाम का अर्थ ही ‘तीन फल’ है। आयुर्वेद में त्रिफला चूर्ण को मुख्य रूप से ‘रसायन’ गुणों के लिए जाना जाता है क्योंकि ये मिश्रण शरीर को शक्ति प्रदान करने और स्वस्थ बनाए रखने में बहुत असरकारी है। ये अनेकों बीमारियों से भी रक्षा करता है।
*त्रिफला चूर्ण निम्न जड़ी बूटियों का मिश्रण है:*
1. आंवला
आंवला या आमलकी पूरे देश में उपलब्ध सबसे सामान्य फलों में से एक है। आंवला में फाइबर, एंटीऑक्सीडेंट, खनिज पदार्थ प्रचुर मात्रा में होते हैं । इसे विटामिन सी का सबसे अच्छा स्रोत माना जाता है। आंवले के सेवन से पेट दुरुस्त रहता है और कब्ज से बचाव होता है। आंवला संक्रमण से भी लड़ने में मदद करता है एवं यह एक एंटी-एजिंग (बढ़ती उम्र के निशान घटाने वाला) फल के रूप में भी प्रसिद्ध है।
2. विभीतकी ( बहेड़ा)
आयुर्वेद में इसे दर्द निवारक, एंटीऑक्सीडेंट और लिवर को सुरक्षा प्रदान करने के लिए उपयोगी माना गया है। श्वास संबंधित समस्याओं के इलाज में विभीतकी लाभकारी है एवं इसमें डायबिटीज को रोकने के गुण भी मौजूद हैं। आयुर्वेद के अनुसार विभीतकी फल में कई जैविक यौगिक मौजूद हैं जैसे कि ग्लूकोसाइड, टैनिन, गैलिक एसिड, इथाइल गैलेट आदि। इन यौगिकों के कारण ही विभीतकी स्वास्थ्य के लिए इतनी फायदेमंद होती है।
3. हरीतकी ( हरड़)
आयुर्वेद में हरीतकी बहुत ही महत्वपूर्ण जड़ी बूटी है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट, सूजन-रोधी और बढ़ती उम्र को रोकने के गुण मौजूद होते हैं साथ ही ये घाव को ठीक करने में भी उपयोगी है। ये लिवर को सामान्य रूप से कार्य करने में मदद करती है। आयुर्वेद में इसे पेट, ह्रदय और मूत्राशय के लिए भी फायदेमंद माना गया है। यहां तक कि इसे ‘औषधियों का राजा’ भी कहा जाता है।
*सामान्य लाभ*-
1. जीर्ण से जीर्ण कब्ज़ दूर करने में सहायक।
2. उदर विकारों एवं पेट में गैस की समस्या (एसिडिटी) लाभकारी।
3. नेत्र ज्योति बढ़ाने में सहायक।
4. शरीर के सभी टॉक्सिंस ( विजातीय द्रव्यों) को जड़ से बाहर कर वजन घटाने और मोटापा कम करने में सहायक।
5. भूख व पाचन शक्ति बढ़ाता है
6.बालों का झड़ना रोकता है।
अनेक प्रकार के रोगों से रक्षा कर रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक है।
- डॉ राजेश बतरा ।
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